Sunday, December 25, 2011

क्या आपको अन्ना संग जेल जाना है?



भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे गांधीवादी अन्ना हजारे के जेल भरो आह्वान को इंटरनेट पर जबर्दस्त समर्थन मिल रहा है तथा अन्ना समर्थक नववर्ष मौजमस्ती के बजाये जेल में गुजारने को तत्पर हैं।

टीम अन्ना ने जेल भरो आंदोलन में अधिक से अधिक युवकों को आकर्षित करने के लिए http://www.jailchalo.com/ (जेलचलोडॉटकाम) नामक वेबसाइट बनाई है, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने जेल जाने के लिये पंजीकरण करा लिया है।

हजारे ने 27 से 30 दिसम्बर तक अनशन के बाद जेल भरो आंदोलन चलाने की घोषणा की है। इस वेबसाइट लांच होने की सूचना मिलते ही लोग इस वेबसाइट पर टूट पड़े। इस वेबसाइट पर जेल भरो आंदोलन की तारीख 30 दिसम्बर से 1 जनवरी लिखी गई है।

इस तरह हजारों युवा हजारे के साथ जेल में अपना नया साल मनाने के लिये तैयार नजर आ रहे हैं। वेबसाइट पर लिखा हुआ है कि इस अभियान में हम आपको आमंत्रित करते हैं जेल जाने के लिए अपनी तत्परता व्यक्त करने के लिये कृपया दाईं तरफ के फार्म का उपयोग करके रजिस्टर करें।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के अलावा लोग लिखित संदेश और एक मिस काल सेवा के जरिये टीम अन्ना से जुड़ सकते हैं।

Friday, June 17, 2011

राजनीतिक बयानबाजी के धुरंधर दिग्विजय सिंह ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया



मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और अब कांग्रेस के महासचिव की जिम्मेदारी निभा रहे दिग्विजय सिंह इन दिनों अपने राजनीतिक बयानों, कथनों और चुटकियों से एक तरह का आंदोलन छेड़े हुए हैं। वे हर मुद्दे पर बोलते हैं, बहुत ही संक्षिप्त बोलते हैं; लेकिन उससे विवाद बड़ा खड़ा कर देते हैं।
वे कभी कहते हैं कि भाजपा ने देश में आतंकवाद की शुरूआत की, तो कभी कहते हैं कि भाजपा नचनियों की पार्टी है और उन्हें महात्मा गांधी की समाधि पर नाचने के लिए शर्म आनी चाहिए। वे पूरे दावे के साथ कहते हैं कि बाबा रामदेव ठग हैं, व्यवसायी हैं, लेकिन संन्यासी नहीं हैं, तो कभी कहते हैं कि रामदेव के पीछे संघ की साजिश है और बाबा उनके एजेंट हैं।

वे बेझिझक कह देते हैं कि बाबा रामदेव की सम्पत्ति की जांच की जाए और उन्हें जेल में डाल दिया जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिर वे इतना पैसा लाते कहां से हैं।

वे कहते हैं कि रामदेव राजनीति में आ जाएं और कभी कहते हैं कि रामदेव के पीछे भाजपा की राजनीति है।

दिग्विजय को यह बेधड़क कहने से कोई गुरेज नहीं होता कि विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर के नाम पर जमा किया गया चंदा खा गई और बजरंग दल सिमी से अलग नहीं है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान उनकी नजर में ‘कंस मामा’ हैं, तो संघ हिटलर की तरह।

दिग्विजय के बयानों का सिलसिला खत्म नहीं होता, वे हर बार एक नया मुद्दा उठाते हैं बयान देते हैं आगे बढ़ जाते हैं। बहुत हुआ तो कभी सफाई देते हैं और कभी साफ-साफ निकल जाते हैं।

बाबा रामदेव के मुद्दे पर जब कांग्रेस आलाकमान ने गैग जारी कर कहा कि कांग्रेसी नेता बाबा रामदेव के खिलाफ कुछ न कहें, तो दिग्विजय ने जैसे सुना ही नहीं और न ही उनके कानों पर जूं तक रेंगी। आलाकमान के गैग को दरकिनार करते हुए वे बोलते रहे और चुटकियां लेते रहे। या फिर कौन कहे कि खुद आलाकमान ने उन्हें उस गैग से अलग रखा हो!

आखिर क्या बात है कि दिग्विजय लगातार हर मुद्दे पर अपने बयानों से विवाद पैदा कर देते हैं? क्या यह उनकी राजनीति का अंदाज है या कांग्रेस की रणनीति? क्यों दिग्विजय केवल एक कथन से पूरी भारतीय राजनीति में खलबली मचा देते हैं और चुप हो जाते हैं।

वे ऐसे ही मुद्दे क्यों उठाते हैं, जिनसे विवाद पैदा होता है?

कांग्रेस और दिग्विजय की राजनीति वे ही जानें हम देखते हैं कि आखिर दिग्विजय की पृष्ठभूमि क्या है।
दिग्विजय सिंह दरअसल गुना जिले के राघोगढ़ रियासत में पैदा हुए राजपूत हैं, लेकिन अब उन्होंने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया है।
22 बरस की ही उम्र में राजनीति में उतरनेवाले दिग्विजय 1977 में ही कांग्रेस की ओर से विधायक बन गए थे। वे अगले तीन बरसों में ही मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गए और 1985 में वे मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी बन गए। सन 1984 और 1991 में सांसद बने और 1993 और फिर 1998 में वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।

मध्य प्रदेश में उनका कार्यकाल भी काफी विवादों से भरा रहा। उनका पहला सत्र तो राज्य को विकास की राह पर बड़ी तेजी से आगे ले गया, लेकिन दूसरे सत्र में उनकी सरकार भ्रष्टाचार और धांधलियों के आरोपों से घिर गई और 2003 में वे चुनाव हार गए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि अगर वे यह चुनाव हार जाते हैं तो अगले दस बरस तक कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे, और दिग्विजय आज तक उस वादे को निभा रहे हैं।

दिग्विजय पर 2001 में एक शराब व्यापारी से दस करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है। झबुआ में हुए नन बलात्कार पर भी उन्होंने हिंदू संगठन पर आरोप लगाया था, जो विवाद का केंद्र बना था।

2004 में इंदौर के एक भूमि घोटाले से भी उनका नाम जुड़ा था और उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।

2009 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ टिप्पणी करने के खिलाफ उन पर मामला दर्ज किया गया था।

2009 में ही इंदौर के मॉल निर्माण में धांधली का मामला सामने आया और उसमें भी दिग्विजय का नाम था। यहां भी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य की आर्थिक अपराध शाखा को दिग्विजय पर धांधलियों के लिए मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।
दिग्विजय का एक पहलू यह है कि वे हमेशा हिंदू संगठनों को आड़े हाथों लेते रहते हैं, जैसे अब यही उनका मिशन हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि हमेशा उनके निशाने पर रहते हैं और वे इन दिनों उन्हें तथाकथित हिंदू आतंकवाद के लिए जिम्मेदार भी ठहराते रहते हैं। दूसरी ओर वे सिमी जैसे मुस्लिम संगठन पर हमेशा से उंगली उठाते आ रहे हैं।

26 नवंबर 2008 को मुंबई हमले में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते के मुखिया हेमंत करकरे की मौत पर उठे सवालों को हवा देते हुए उन्होंने कह दिया था कि करकरे ने उन्हें अपनी मौत से पहले फोन पर बताया था कि उनकी जान को हिंदू समूहों से खतरा है। यह विवाद खूब उछला, बहुत ‘तू-तू, मैं-मैं’ भी हुई। अब सवाल यह है कि क्या वे सबूतों के आधार पर राजनीति करते हैं या अपने दो टूक बयान देते हैं या फिर यूं ही कुछ भी बोलते चले जाते हैं और विवाद खड़े करते हैं? वे कहते हैं कि संघ भारत में कई आतंकवादी हमलों के पीछे जिम्मेदार है और अजमेर धमाके का आरोपी सुनील जोशी इसका सबूत है, जिसकी अब हत्या कर दी गई है; क्योंकि वह संघ के बारे में बहुत कुछ जान गया था। यह दूसरी बात है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने दिग्विजय पर ही इल्जाम लगा दिया कि सुनील जोशी की हत्या के पीछे उनका हाथ है और मुझे फंसाने के पीछे भी उन्हीं का हाथ है।

दूसरी ओर उन पर मुस्लिम समुदाय की तरफदारी करने का आरोप भी लगाया जाता है। राजनीतिक बयानबाजी के धुरंधर खिलाड़ी दिग्विजय कांग्रेस के पक्ष से जिस तरह की भूमिका निभा रहे हैं वह शायद कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा हो, क्योंकि कांग्रेस ने कभी भी दिग्विजय के किसी भी बयान पर आपत्ति नहीं जताई है यानी उसे दिग्विजय की जरूरत है, जो अपने ही खास अंदाज में राजनीति का एक मोर्चा संभाले हुए हैं।

Saturday, May 14, 2011

यहां हर लड़की 40-45 हजार महीना कमाती थी - फर्जी फ्रेंडशिप क्लब का भंडाफोड़


क्राइम ब्रांच ने अखबारों में विज्ञापन देकर फ्रेंडशिप कराने और मसाज की ट्रेनिंग दिलाने के नाम पर युवकों से ठगी करने वाले रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस रैकेट में शामिल 26 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 20 लड़कियों और 5 लड़कों के अलावा एक महिला भी है , रैकेट का सरगना फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर की बिल्डिंग में तीन फ्लोर पर चल रहे इस सेंटर के दफ्तर को सील कर दिया है।

डीसीपी ( क्राइम ) अशोक चांद के मुताबिक , सूचना मिली थी कि राजधानी में एक साल से फर्जी फ्रेंडशिप क्लब और मसाज पार्लर ट्रेनिंग सेंटर युवकों से ठगी कर रहा है। रैकेट से जुड़े लोग अलग - अलग नामों से अखबारों में इश्तहार देते थे। फ्रेंडशिप क्लब के लिए जहां वह ' हनिमून नाइट्स फ्रेंडशिप क्लब ' का इस्तेमाल करते थे , वहीं मसाज देने की ट्रेनिंग दिलाने के लिए काकुल मसाज पार्लर , शीला मसाज पार्लर , शीतल मसाज पार्लर , काया मसाज पार्लर और प्रतिज्ञा मसाज पार्लर आदि नामों का। ये लोग दिल्ली के अलावा यूपी , गुजरात और आंध्र प्रदेश के अखबारों में भी विज्ञापन देते थे।

डीसीपी ने बताया कि इन इश्तहारों में दिए गए नंबर पर जब कोई युवक फोन करता था , तो ये उसे तरह - तरह के प्रलोभन देकर फांस लेते थे। कॉलर जब इनकी बातों में आकर क्लब से जुड़ने को तैयार हो जाता था , तो ये उससे पहले रजिस्ट्रेशन मनी के तौर पर एक हजार रुपये की डिमांड करते थे। पेमेंट जमा करने के लिए कॉलर को एक बैंक अकाउंट नंबर दिया जाता था। उसके बाद कॉलर को तीन कैटिगरी की महिला मित्रों के बारे में बताया जाता था। पहली कैटिगरी 7 हजार , दूसरी 5 हजार और तीसरी कैटिगरी 3 हजार रुपये की थी। जब युवक इनमें से एक कैटिगरी चुनने के बाद अकाउंट में रकम जमा कर देता था , तो उसे रैकेट से जुड़ी कुछ लड़कियों के नंबर दे दिए जाते थे। ये लड़कियां कॉलर से निश्चित समय तक ही बात करती थीं और कुछ समय के बाद उनके फोन उठाने बंद कर देती थीं।

डीसीपी ने बताया कि मसाज करने की ट्रेनिंग पाने की इच्छा रखने वाले युवक जब इन्हें कॉल करते थे , तो उन्हें प्रलोभन दिया जाता था कि उनकी ट्रेनर महिला होगी। इसके लिए उन्हें 7 हजार रुपये जमा कराने होंगे , जबकि मसाज किट के नाम पर उनसे 3750 रुपये अतिरिक्त मांगे जाते थे। एक बार खाते में पैसे आ जाने के बाद रैकेट के लोग कॉल रिसीव करना बंद कर देते थे।

डीसीपी ने बताया कि इस मामले में दिनेश (27), हितेंद्र रावत (24), सचिन पाल (22), सुनील (26) और राजेश सिंह उर्फ सोनू (26) को गिरफ्तार किया गया है। 20 लड़कियों को भी गिरफ्तार किया गया है , जिनकी उम्र 19 से 24 साल के बीच बताई जा रही है। इनमें अधिकतर ग्रैजुएट और स्कूल ड्रॉप आउट हैं। पुलिस ने इस मामले में 40 साल की महिला को भी अरेस्ट किया है , जो इन लड़कियों का सुपरविजन करती थी। पुलिस रैकेट के सरगना राजेश सिंह को तलाश कर रही है

यहां हर लड़की 40-45 हजार महीना कमाती थी

फर्जी फ्रेंडशिप क्लब और मसाज ट्रेनिंग के जरिए इस रैकेट से जुड़े लोग मोटी कमाई करते थे। महज फोन पर बात करके गैंग से जुड़े लोग युवकों से हजारों रुपये की ठगी कर लेते थे। यह कलेक्शन लाखों में बैठती थी। पुलिस की मानें तो इस रकम का बंटवारा रैकेट के मेंबर की ठगी में भूमिका के आधार पर होती थी। हर लड़की को जहां प्रतिमाह 40 से 45 हजार रुपये मिलते थे , वहीं रैकेट को प्रतिदिन औसतन डेढ़ लाख रुपये की कमाई होती थी।

पुलिस के मुताबिक , जब क्राइम ब्रांच ने जनकपुरी स्थित डिस्ट्रिक्ट सेंटर में रैकेट के दफ्तरों पर रेड डाली तो मौके से 2 लैपटॉप , 60 मोबाइल फोन के अलावा कॉलर्स की डिटेल मिली , जिन्हें सीज कर दिया गया। इन दस्तावेजों के जरिये रैकेट की अंधी कमाई की कहानी भी पुलिस को पता चली है।

पुलिस ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट सेंटर के तीन अलग - अलग फ्लोर से ऑपरेट करने वाले इस रैकेट की मासिक उगाही लाखों में थी। रैकेट से जुड़े लोग एक फ्लोर का जहां 23 हजार रुपये प्रतिमाह किराया देते थे। वहीं , दो अन्य फ्लोर का 15-15 हजार रुपए मासिक किराए के रूप में भुगतान किया जाता था।

पुलिस के मुताबिक , रैकेट में अहम भूमिका अदा करने वाली 20 लड़कियों को सबसे ज्यादा आर्थिक लाभ होता था। उन्हें प्रतिमाह 40 से 45 हजार रुपये मिल जाते थे। इसके अलावा प्रत्येक क्लाइंट से मिलने वाली कुल रकम का 5 फीसदी कमिशन के तौर पर उन्हें दिया जाता था। 19 से 24 साल की 20 लड़कियां इस गैंग में थीं। इनमें अधिकतर ग्रैजुएट हैं , जबकि कुछ स्कूल ड्राप आउट बताई जा रही हैं। पुलिस ने साफ किया कि चूंकि इस काम मंे लड़कियों को बिना किसी हार्ड वर्क के मोटी कमाई हो रही थी इसलिए वे इससे जुड़ी हुई थीं।

पुलिस ने बताया कि इस गैंग के सरगना राजेश सिंह की मदद के आरोप में गिरफ्तार दिनेश , सचिन और हितेंद्र ग्रैजुएट हैं , जबकि राजेश उर्फ सोनू स्कूल ड्रॉप आउट। राजेश उर्फ सोनू और सुनील को जहां ऑफिस मैनेजर की डेजिगनेशन थी , वहीं हितेंद्र और सचिन पर बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल संभालने का जिम्मा था। दिनेश को अखबारों मंे विज्ञापन देने का जिम्मा सौंपा गया था।